Menu

अपने आप को कैसे अव्वल बनाये

अपने आप को कैसे अव्वल बनाये

हम देख़ते हम पड़े में कमजोर होते हम चाहते हर हम भी कुछ जल्दी सिख जाये इसकेलिए हम आपको कुछ बताना चाहते

सबसे महत्वपूर्ण कार्य जो करना है वह दो स्तर पर होगा- पढाई की वह पध्दति जो आपके लिए काम कर सके उसे कार्यरूप में परिणित किया जाए या स्थापित किया जाये. प्रत्येक व्यक्ति के सीखने की पध्दति अलग होती है. आप स्वयं सर्वश्रेष्ठ रूप में कैसे सीख सकेंगे ये स्वयं समझना होगा. वह कार्य जो आप हाई-स्कुल में शिक्षा प्राप्त करने में करते थे व्यक्तिगत तौर पर सर्वश्रेष्ठ शिक्षा पध्दति के न हो. हाई-स्कुल की पढाई हायर सेकेंड्री स्कुल के पढाई से सरल होती है, परन्तु जब स्कुल शिक्षा से हायर सेकेंड्री शिक्षा के स्तर पर पहुचते हैं तो वह शिक्षा पध्दति इस नई शिक्षण-नीति में फलदायी नहीं होती और इस वास्तविकता को समझ नही पाते हैं यही बड़ी कठिनाई है. यह कठिनाई आपके लिए स्नातक स्तर की शिक्षा के समय भी आती है. आपके समक्ष हाई-स्कुल और हायर सेकेंड्री स्कुल की शिक्षा पध्दति का अंतर उपस्थित होता है जिसे ध्यान में रखकर अध्ययन करना होगा..

जब आप हायर-सेकेंड्री स्कुल के प्रथम वर्ष की परीक्षा करते हैं तब यह समझ पाते हैं कि हाई-स्कुल और हायर-सेकेंड्री की पढाई में अंतर है दुर्भाग्य से उस समय कुछ विद्यार्थी यह विश्वास करने लगते हैं कि वे इससे बेहतर नही कर सकते.. वे कभी अपनी बेहतर क्षमता का प्रदर्शन नही कर पाते और दुर्भाग्य से कुछ तो पूरी तरह निराश होकर बैठ जाते हैं..

यह कुंजी आपको यह समझने में सहायता करती है कि पुनरावृति (दोहराना) एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इसे लिखित परीक्षा के 2 सप्ताह पूर्व ही करना है जो कि यह उचित नही है. हम आपको परीक्षा के लिए एक सही तकनीक (प्रक्रिया) से तैयार करने में सहायता करते हैं. एक ऐसी तकनीक बताकर जो आपकी नोट्स लेने की कौशल को बेहतर करती है, हम यह भी बतलाना चाहते हैं कि परीक्षा किस तरह दें और परीक्षा में प्रश्न-पत्र के प्रश्नों को सुलझाने की क्षमता को किस तरह बढ़ाएं..

 

पढाई की सामान्य बातें:-

पढाई के लिए कुछ सामान्य टीप निम्नांकित हैं:-

 

(१.) पढाई के लिए एक शांत एवं एक प्रकाशपूर्ण स्थान चुने, यह आवश्यक है कि आप खुद को अनावश्यक बाधाओं से अलग कर लें, दूसरों से स्पष्ट कहें कि आप काम कर रहे हैं एवं एकांत चाहते हैं और काम के बाद आप उनसे मिलेंगे.

(२.) पढाई के लिए आप टेबल अथवा डेस्क का उपयोग करें. पढाई के लिए आप बिस्तर या आराम कुर्सी पर बिलकुल न लेटें, अगर आप चाहें तो बीच-बीच में कुछ देर के लिए विश्राम लें.

(३.) पढाई के लिए दिन का सबसे अच्छा समय चुनें. कुछ विद्यार्थी ब्रम्हमुहूर्त का समय ठीक समझते हैं तो किसी को देर रात्रि का समय ठीक लगता है. दिन का सबसे बेहतर समय चुने जिसमे आप एकाग्रता से अपनी पढाई पूरी कर सकें.

(४.) जैसे ही कक्षा समाप्त होती है अपने क्लास नोट्स की पुनरावृति कर लें.

(५.) दिन के कुछ घंटे गंभीर अध्ययन के लिए निश्चित कर लें एवं उसका कड़ाई से पालन करें.

(६.) अपने आपको शाबाशी दें. इनाम दें. खुद से वादा करें कि यदि आपने इन निश्चित घंटों में गंभीर अध्ययन किया तो कुछ देर मनोरंजन के लिए रखेंगे और जब आप अपने लक्ष्य पर पहुंचें तो अपने दोस्तों के साथ घूमने जाएँ, कोई फिल्म देख आयें.

(७.) अगर आप चाहें तो छोटे-छोटे विराम लें. कहा जाता है व्यक्ति 30 मिनट पूरी एकाग्रचित हो सकता है उसके बाद उसकी एकाग्रता कम होने लगती है. जब आप महसूस करें कि अब आप पूरी तरह से एकाग्र नही हो पा रहे तो उठें, कुछ देर टहलें, कुछ पियें (फलों का रस, कॉफी, दूध, चाय, शर्बत इत्यादि) और फिर बैठें.

कई बार दूसरों के साथ अध्ययन करने पर आप यह जान सकते हैं कि विषय को पूरी तरह से समझ पायें हैं या नहीं. यदि आपने प्रश्नों के सही उत्तर दिए हैं और उसे आप दूसरों को अच्छी तरह समझा पाने में सफल हो गए तो समझिए कि आपके द्वारा अध्ययन किये गए विषय को आपने आत्मसात कर लिया. वरना आप महसूस करेंगे कि अभी कुछ और मेहनत करना जरूरी है.

दुसरे विद्यार्थियों के साथ study करते वक्त सावधान रहिये. कुछ student पढाई के प्रति गंभीर न रहकर अपना और आपका मूल्यवान समय नष्ट कर सकते हैं. इसलिए अत्यंत सावधानी से चुनिए कि आपको किसके साथ अध्ययन करना है.

Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Cancel reply
Leave a Comment
Your email address will not be published. Required fields are marked *