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डॉ प्रणव को था महामहिम कहे जाने पर एतराज जानिये

डॉ प्रणव को था महामहिम कहे जाने पर एतराज जानिये

[vc_row][vc_column][vc_column_text]देश के 13 वे राष्ट्रपति के रूप में केंद्र सरकार के साथ बेहद आत्मीय रूप से जाने जाने वाले प्रणव का कहना हे की मेरे वो फैसले भी याद किये जायेगे जिन्होंने अग्रेजो के जमाने में भी लोगो की सोच को बदलने का काम किया था जो की इन्ही में से एक निर्णय लिया गया था , कि राष्ट्पति पद पर आसीन व्यक्ति के लिए किसी भी निर्णय को लेने के लिए बहुत शक्ति चाहिए जो की प्रणव के पास थी लोगो कि सोच को भी इसके द्वारा आसानी से बदला जा सकता हे |

डॉ प्रणव को था महामहिम कहे जाने पर एतराज जानिये

ये भी कहा जाता हे की अग्रेजो के जमाने में वायसरॉय या गवर्नर जनरल, जो इंग्लैंड के जो महारानियाँ होती थी वे भी एक प्रतिनिधि के रूप में शासन किया करती थी, और आजादी के बाद भी इसी पद के सम्बोधन के लिए वे भी चिपके रहे .. लोगो का कहना हे की डॉ मुखर्जी ऐसे राष्ट्रपति थे जो की , जिन्होंने खुद ही भरतीय मानसिकता में बस चुके इन संबोधनों को राष्ट्रपति पद से दूर किया हे |

कहा जाता हे की 11 दिसम्बर, 1935 को पश्चिम बंगाल राज्य के भीरपुर में जन्मे और एक स्कूली अध्यापक के रूप में अपने जीवन कि शुरआत करने वाले प्रणव मुखर्जी आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति होने जा रहे हे |

राजनीत शास्त्र और इतिहास में भी उनका नाम भी लिख चूका हे जिससे हमारे देश के नागरिको को भी बहुत ही गर्व महसूस हो रहा होगा जिससे हमारे देश को भी नयी उपलब्धी हासिल हो चुकी हे | मुखर्जी ने भी केंद्र सरकार के मुख्य पदों को भी संभाल चुके हे और ये हमेशा हे संयत रहने लिए बहुत ही मशहूर माने जाते हे | इसके साथ ही लोगो का यह भी कहना हे की उनके गुणों कि प्रशंसा उनके विरोधी भी करते हे |

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