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भारत में पहली बार सिर से जुड़े बच्चो का ऑपरेशन,पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा

भारत में पहली बार सिर से जुड़े बच्चो का ऑपरेशन,पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा

भारत में पहली बार दिल्ली AIIMS में सिर से जुड़े दो बच्चों को अलग करने का ऑपरेशन किया गया | इसका पहला चरण सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया | इस ऑपरेशन को सफलता पूर्वक पूरा करने के लिए 40 डॉक्टर्स की टीम ने इस चरण में अहम् योगदान दिया |

जगन्नाथ और बलराम नामक सवा दो साल उम्र के ये बच्चे उड़ीसा के कंधमाल जिले के रहने वाले हैं और उनके माता पिता बहुत गरीब थे | और वह इन बच्चो का खर्च उठाने में अशमर्थ थे | इसलिए उन्होंने ओडिशा सरकार से मदद मांगी | और ओडिशा सरकार ने पहल करते हुए इन दोनों बच्चो को सही इलाज मुहैया हो इसलिए सरकारी मदद की कर उनको दिल्ली के AIIMS में भर्ती किया गया | जिससे उनका पहले चरण में सफलता मिली |

इस ऑपरेशन के पहले चरण को पूरा करने के लिए 40 डॉक्टर्स की टीम को 24 घंटे लगे | इस ऑपेरशन को डॉक्टर्स ने 28 अगस्त को शुरू किया था और 29 अगस्त की सुबह तक इसका ऑपरेशन चला | जिसमे डॉक्टर्स ने सफलता हासिल की |

ऑपरेशन करने में आई कई मुसीबते

बच्चों के सिर जुड़े होने का इस तरह का मामला भारत में कम ही देखने को मिलते है ।इस तरह का मामला पुरे विश्व में ढाई करोड़ बच्चों में से किसी एक में होता है। इस तरह के मामलों में लगभग 40% बच्चे जन्म के वक्त ही मर जाते हैं, जबकि अन्य 30% अगले चौबीस घंटे में दम तोड़ देते हैं। 1952 से अभी तक दुनिया भर में केवल 50 मामलों में डॉक्टरों ने बच्चों के सिर अलग करने की कोशिश की है। इस तरह की सर्जरी के सफल होने की संभावना केवल 25% होती है।

जिन बच्चों की सर्जरी एम्स में की जा रही है, वह केस और भी जटिल है। दोनों बच्चों के सिर के बीच से नसें गुजरती हैं, जिनसे उनके दिमाग और दिल में ब्लड सर्कुलेशन होता है। ऑपरेशन में हिस्सा लेने वाले एम्स के न्यूरोसर्जन डॉ. दीपक गुप्ता के मुताबिक सर्जरी के लिए विशेष तैयारी की गई थी। इन बच्चों के बेड पर सोते वक्त दोनों का सिर जहां बीच में होता है, वहीं शरीर एक-दूसरे के विपरीत दिशा में रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए सर्जरी के दौरान दो ऑपरेशन टेबलों और एनेस्थीसिया के लिए दो मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

विदेशी स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स को भी बुलाया गया

क्योकि भारत में पहली बार इस तरह का ऑपरेशन किया इसके लिए जापान से विदेशी स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स को भी बुलाया गया जिससे की ऑपरेशन करने में कोई दिक्कत नहीं आये | पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-एनेस्थीसिया, प्लास्टिक सर्जरी और कार्डियोवस्कुलर साइंस के कई स्पेशलिस्ट इन्वॉल्व थे |

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