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कोविंद के अरुणाचल दौरे पर जाने से , चीन भड़का दिया ये जवाब

कोविंद के अरुणाचल दौरे पर जाने से , चीन भड़का दिया ये जवाब

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर चीन ने आपत्ति जताई है। चीन ने कहा कि बॉर्डर विवाद के बाद जब दोनों देशों के बाइलेटरल रिश्ते बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं, और दोनों देशों के बीच इसे लेकर बातचीत चल रही है तो भारत को इसका ध्यान रखना चाहिए। बता दें कि कोविंद चार दिन के अरुणाचल दौरे पर रविवार को ईटानगर पहुंचे। वे विधानसभा के स्पेशल सेशन को भी संबोधित करेंगे।

- चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन लु कांग ने कहा - "चीन की सरकार पर कभी भी अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दे सकती है। बॉर्डर मुद्दे पर हमारी स्थिति लगातार एक सी और साफ है।"

- उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि भारत इसी दिशा में काम कर सकता है। इससे बाइलेटरल संबंधों को मजबूती मिलेगी और बॉर्डर मुद्दे पर बातचीत करने में मदद मिलेगी। दोनों देश बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकालने की प्रोसेस में हैं और ऐसे हल पर पहुंचना चाहते हैं जो सभी को मंजूर हो।

- बता दें कि चीन इस इलाके में भारत के किसी भी अफसर या नेता के विजिट का विरोध करता आ रहा है। उधर, भारत चीन की आपत्ति को नकारता रहा है। भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। भारतीय नेता देश के किसी भी हिस्से में घूमने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

19 राउंड की बातचीत हो चुकी है दोनों देशों के बीच

- बॉर्डर विवाद पर दोनों देशों के बीच 19 राउंड की बातचीत हो चुकी है। 20वें राउंड की बात अगले महीने दिल्ली में होने की उम्मीद है। अभी तक तारीख तय नहीं हुई है। बता दें कि इस विवाद को सुलझाने का जिम्मा नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल और चीन के यांग जीईची को दिया गया है।

भारत-चीन ने माना- बेहतर रिश्तों के लिए बॉर्डर पर शांति जरूरी

- भारत-चीन ने सिक्किम सेक्टर के डोकलाम और लद्दाख में हाल ही में हुए सैन्य टकराव के बाद पहली बार बॉर्डर पर हालात का रिव्यू किया। इसके लिए बीजिंग में पिछले दिनों मीटिंग हुई। इसमें इस बात पर सहमति जताई कि बेहतर रिश्तों के के लिए शांति बनाए रखना जरूरी है।"

- "बातचीत क्रिएटिव और पॉजिटिव तरीके से हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा के सभी सेक्टरों में हालात का रिव्यू किया और दोनों ने इस बात पर रजामंदी जताई कि दोनों तरफ से रिश्तों की मजबूती के लिए बॉर्डर पर शांति बनाए रखना जरूरी है।"

डोकलाम पर 72 दिन चला था टकराव

- बता दें कि भारतीय-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच मिड 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। बाद में अगस्त में यह टकराव खत्म हुआ और दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी।

क्या था डोकलाम विवाद?

- डोकलाम में विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने वहां चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का दावा था कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा था।

- इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।

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