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मध्यप्रदेश : कुछ शातिर लोगो द्वारा ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ के नाम पर गरीबो को लुटा जा रहा है

मध्यप्रदेश : कुछ शातिर लोगो द्वारा ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ के नाम पर गरीबो को लुटा जा रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ को मध्य प्रदेश में कुछ शातिर दिमागों ने गरीबों को लूटने का जरिया बना लिया है. इस योजना को ऐसे लोगों को फंड देने के लिए लाया गया है जिनके पास फंड जुटाने के लिए खुद किसी साधन तक पहुंच नहीं है. मध्य प्रदेश में जगह जगह फैले दलाल निरक्षर और अपात्र ग्रामीण लोगों को कर्ज लेने के लिए दबाव डाल रहे हैं.

इंडिया टुडे की जांच से सामने आया है कि किस तरह ग्रामीण लोगों से उस कर्ज के लिए ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर पैसा ऐंठा जा रहा है जो कर्ज उन्हें कभी मिलना ही नहीं है. यही नहीं, ग्रामीणों से धन ऐंठने के लिए बेरोजगारों को भी जरिया बनाया गया. इन बेरोजगारों को दस हजार रुपए प्रति महीना देने के नाम पर ग्रामीणों से पैसा इकट्ठा करने पर लगा दिया गया.

बता दें कि अप्रैल, 2015 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य छोटी कारोबारी इकाइयों की वित्तीय जरूरतों को आसान बनाना था. इसके तहत सभी गैर कृषि लघु कारोबार, जो कि आय अर्जित करने में सक्षम हैं और जिन्हें दस लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता की जरूरत है, वो इस योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए किसी तरह की कोई ‘प्रोसेसिंग फीस’  भी नहीं देनी पड़ती. इस योजना के तहत कर्ज के लिए आवेदन करने की अहम शर्तों में ‘विस्तृत बिजनेस प्लान’ जमा कराना जरूरी है.

लेकिन मध्य प्रदेश में लोगों को कर्ज दिलाने के नाम पर चूना लगाने का गोरखधंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है. इंडिया टुडे ने ऐसे लोगों का पता लगाया जिनसे फॉर्म भरने और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे झटक लिए गए. ऐसे ही एक शख्स हैं विदिशा जिले की गंज बसोडा तहसील के कला खेड़ी गांव में रहने वाले गणेश राम कुशवाहा. 54 वर्षीय कुशवाहा से एक दलाल ने ये कह कर संपर्क किया कि उन्हें मुद्रा योजना के तह तीन लाख रुपए का कर्ज मिल सकता है बशर्ते कि वो 120 रुपए की शुरुआती फीस जमा करे. दलाल ने कुशवाहा को एक रसीद भी दी जिसके ऊपर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और उद्योग आधार कार्ड मोटा मोटा लिखा था. इंडिया टुडे के पास ये रसीद मौजूद है.

कुशवाहा ने कहा, ‘मुझसे 120 रुपए लेने के बाद कहा गया कि मुझे कारोबार के लिए तीन लाख रुपए का कर्ज दिला दिया जाएगा. मेरा पहले से कोई कारोबार नहीं है लेकिन मुझे कहा गया कि मैं कोई भी कारोबार शुरू कर सकता हूं. जिस शख्स ने मुझसे 120 रुपए लिए वो फिर वापस नहीं आया.’

कुशवाहा अकेले नहीं जिन्हें दलालों ने धोखाधड़ी का शिकार बनाया. इंडिया टुडे ने विदिशा जिले की सभी 10 तहसील में ऐसे कई लोगों से बात की. किसान केसरी सिंह ने बताया, ‘मेरे भाई मोती सिंह को बेवकूफ बनाया गया. दलालों ने दो से तीन लाख रुपए कर्ज दिलाने का वादा किया था. हमारा कोई कारोबार नहीं है.’

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