Menu

Breaking News : गुजरात में आयकर अधिकारी के निलंबन पर , हुई ये समस्याएं

Breaking News : गुजरात में आयकर अधिकारी के निलंबन पर , हुई ये समस्याएं

गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार चरम पर है. लेकिन इसी दौरान राज्य के आयकर विभाग का एक ताज़ा घटनाक्रम भी कार्यवालिका के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. सुरेंद्रनगर जिले में तैनात इनकम टैक्स विभाग के एक बड़े अफसर का पिछले दिनों आनन-फानन हुआ तबादला और उसके दो दिन बाद ही उसके निलंबन से आयकर विभाग के अधिकारियों में खासी सुगबुगाहट है और इसकी आहट दिल्ली और देशभर में तैनात आयकर विभाग के कई अन्य कार्यालयों में महसूस की जा सकती है.

गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में तैनात इनकम टैक्स के डिप्टी कमिशनर डीके मीणा को तीन दिन में दो विभागीय आदेश प्राप्त हुए.  उन्हें 22 नवंबर को मिले पहले आदेश में कहा गया है कि मीणा का तबादला तत्काल प्रभाव से सुरेंद्र नगर से राजकोट कर दिया गया है. मीणा के साथ ही उनके संग काम कर रहे इनकम टैक्स इंस्पेक्टर अनिल कुमार शर्मा को भी तबादला ऑर्डर थमाकर वडोदरा भेज दिया गया.

ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया था. लेकिन कार्रवाई यहीं नहीं रुकी. दो दिन बाद ही एक और आदेश आया जिसमें मीणा को निलंबित कर तत्काल प्रभाव से केरल के कोच्चि भेज दिया गया. उन्हें यह भी आदेश दिया गया कि वो प्रिंसिपल चीफ कमिशनर कोच्चि के आदेश के बिना हेडक्वार्टर न छोड़ें.

विभाग ने इस कार्रवाई के पीछे नियमों और कामकाज में सही तरीका न अपनाने का आरोप लगाया है. लेकिन विभाग के सूत्रों की मानें और खुद मीणा के एक पत्र को देखें तो इसके पीछे की वजहें कुछ और हैं और यही कारण है कि इस पूरी कार्रवाई से आयकर विभाग में अंदर काफी गर्माहट महसूस की जा रही है.

क्या है मामला

दरअसल मीणा सुरेंद्रनगर में जालाराम जिनिंग फैक्ट्री के एक मामले की जांच कर रहे थे. कंपनी के खातों की जांच के दौरान मीणा ने पाया कि कंपनी द्वारा काजल वी. गंधेचा नाम की महिला को 25 लाख का कमीशन पेमेंट दिया गया था. बतौर जांच अधिकारी मीणा इस मामले में कंपनी से जवाब चाहते थे और इसके लिए उन्होंने कंपनी को एक के बाद एक तीन नोटिस जारी दिए.

aajtak.in के पास मौजूद कागजातों के मुताबिक मीणा ने कंपनी को पहला नोटिस 19 जून 2017 को भेजा. कंपनी की ओर से जवाब न मिलने पर तीन महीने बाद दूसरा नोटिस 21 सितंबर को भेजा और तीसरा नोटिस 15 नवंबर को दिया गया. तीसरे नोटिस के साथ मीणा ने काजल वी. गंधेचा को भी सम्मन जारी कर 20 नवंबर को उन्हें तलब कर लिया.

सम्मन में दी गई 20 नवंबर की तारीख पर गंधेचा तो जवाब देने नहीं आईं लेकिन ठीक दो दिन बाद यानी 22 नवंबर को मीना और उनके इंस्पैक्टर का तबादला हो गया. तबादले के दो दिन बाद ही मीणा को सस्पेंड कर दिया गया.

मीणा के खिलाफ इस कार्रवाई से पूरा टैक्स महकमा हिला हुआ है. अहमदाबाद, दिल्ली और यहां तक कि देश के दूर-दराज के इलाकों में इनकम टैक्स अफसरों में इस कार्रवाई की चर्चा है.

कदाचार या फ़र्ज़ की सज़ा

मीणा पर हुई इस कार्रवाई पर बाहर कोई चर्चा नहीं हो रही थी क्योंकि अधिकतर समाचारपत्रों ने इस समाचार को छापने योग्य नहीं समझा. हालांकि एक दिसंबर को स्थानीय गुजराती अखबार 'गुजरात समाचार’ में इस बाबत खबर छपी जिसमें मीणा को हटाने के पीछे कुछ कथित आरोपों का ज़िक्र किया गया.

इस खबर के प्रकाशित होने के तुरंत बाद यानी एक दिसंबर की शाम को ही इनकम टैक्स विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर बयान जारी किया कि मीणा नियम से बाहर जाकर काम कर रहे थे और करदाता को परेशान कर रहे थे. विभाग के मुताबिक कदाचार के कारण मीणा पर यह कार्रवाई की गई थी.

विभाग के मुताबिक मीणा को लिमिटेड स्क्रूटनी करनी थी लेकिन बिना अपने संबंधित वरिष्ठ अफसरों की इजाजत लिए वे मामले की कंप्लीट स्क्रूटनी करने लगे. ये सीटीबीटी के ऐसे केसों को लेकर जारी निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है. इसीलिए उनका निलंबन किया गया है. ये कदाचार और लापरवाही का मामला है.

अहमदाबाद में तैनात एक इनकम टैक्स अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस मामले में मीणा के खिलाफ कोई लिखित शिकायत तक दर्ज नहीं हुई है.  इनकम टैक्स से जुड़े कई अधिकारियों से हमने बात की और उन सबके मुताबिक मीणा के खिलाफ कार्रवाई सामान्य नहीं है.  एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'अगर मान भी लिया जाए कि मीणा कुछ गलत कर रहे थे या उनके खिलाफ कोई शिकायत थी तो कार्रवाई करने से पहले उनसे उनका पक्ष तो जानना ही चाहिए था.’

अधिकारी ने यह भी बताया कि लिमिटेड स्क्रूटनी के लिए जिन बिंदुओं का ज़िक्र किया गया था, मीणा उन्हीं बिंदुओं की सीमा में जांच कर रहे थे.

मीणा की चिट्ठी-दुर्भावना से प्रेरित है कार्रवाई

इस मामले में खुद मीणा ने 1 दिसंबर को इनकम टैक्स गजेटेड ऑफिसर एसोसिएशन को पत्र लिखकर कहा कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय का भी उल्लंघन हुआ है और उन्हें अपना पक्ष तक रखने का मौका नहीं दिया गया.

पत्र में मीणा अपने ऊपर हुई कार्रवाई के पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए लिखते हैं कि वो जिन लोगों की जांच कर रहे थे वो भारत सरकार के वित्त सचिव के करीबी हैं और इसी वजह से उन्हें उस गलती के लिए सजा दी जा रही है जो उन्होंने की ही नहीं.

पत्र में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस(CBDT) के चेयरमैन सुनील चंद्रा पर भी सवाल उठाया गया हैं कि आखिर उन्होंने अधिकारी का पक्ष जाने बिना उसके निलंबन का आदेश कैसे पारित होने दिया.

वित्त सचिव और चेयरमैन चंद्रा को हमने उनके सरकारी मेल आइडी पर संपर्क किया और उनका पक्ष जानना चाहा है. खबर प्रकाशित करने तक इनकी तरफ से हमें कोई भी जवाब नहीं मिला है.

एक निजी कंपनी के खातों में 25 लाख रूपये के लेनदेन की जांच कर रहे इस इनकम टैक्स अधिकारी पर हुए कार्रवाई ने कई सवालों को जन्म दिया है. इन सवालों में सबसे अहम यह सवाल है कि अगर इस तरीके से किसी जांच अधिकारी पर कार्रवाई होगी तो वो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कैसे लड़ेंगे?

Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Cancel reply
Leave a Comment
Your email address will not be published. Required fields are marked *