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महात्मा गांधी हत्या की दोबारा जांच की अपील के बाद , SC ने कहा फोटो के आधार पर सुनवाई कैसे हो

महात्मा गांधी हत्या की दोबारा जांच की अपील के बाद , SC ने कहा फोटो के आधार पर सुनवाई कैसे हो
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि एक फोटोग्राफ के आधार पर सुनवाई कैसे कर सकते हैं जबकि कानून के मुताबिक फोटो लेने वाले को ये बताना होगा कि किन परिस्थितियों में फ़ोटो ली गई है. सुप्रीम कोर्ट 4 हफ्ते बाद मामले की सुनवाई करेगा. इससे पहले महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच कराने के मामले में एक नया मोड़ आ गया था. महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच की जरूरत ना बताते हुए एमिक्स क्यूरी वरिष्ठ वकील अमरेंद्र शरण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे ये साबित हो महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे की जगह किसी और ने की हो.अमरेंद्र शरण ने अपने जवाब में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो याचिकाकर्ता पंकज फडणवीस के उस दावे को साबित करे जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी को चार गोलियां लगी थी ये दावा किया था.

अमरेंद्र शरण ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो ये साबित करे कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे किसी और का हाथ था. सुप्रीम कोर्ट ने अमरेंद्र शरण को इस मामले में एमिकस नियुक्त किया था. याचिकाकर्ता पंकज फडनीस ने महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच की मांग की है. याचिकाकर्ता पंकज फडनीस ने सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल कर यह दावा किया है कि इस मामले में फांसी पर लटकने वाले नारायण दत्तारेय आप्टे की पहचान पर संदेह है. याचिकाकर्ता ने गांधी की हत्या में विदेशी हाथ होने की आशंका जताई है. अभिनव भारत के ट्रस्टी पंकज फडनीस की इस याचिका में कहा गया है कि 1966 में गांधी की हत्या के पीछे साजिश का पता लगाने के लिए गठित जस्टिस जेएल कपूर जांच आयोग ने कहा था कि आप्टे भारतीय वायु सेना में था लेकिन पिछले साल सात जनवरी को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पारिकर ने याचिकाकर्ता को जानकारी दी थी कि आप्टे के भारतीय वायु सेना में होने की कोई जानकारी नहीं है. याचिकाकर्ता ने पर्रिकर से मिले इस पत्र को याचिका के साथ जोड़ा है.

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