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इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब भारत सरकार ने विश्व बैंक से नहीं लिया एक भी रुपया उधार

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब भारत सरकार ने विश्व बैंक से नहीं लिया एक भी रुपया उधार
विश्व बैंक ने विद्युतीकरण में भारत के काम को अत्यंत बेहतर माना है। देश की लगभग 85 फीसद आबादी तक बिजली पहुंच चुकी है। 2010 और 2016 के बीच भारत में हर साल तीन करोड़ लोगों को बिजली मुहैया कराई गई। यह अन्य किसी भी देश के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसके साथ ही वैश्व‍िक संस्था ने सरकार को इससे जुड़ी चुनौतियों की भी याद दिलाई।

सूत्रों ने बताया कि पीएनबी के महाप्रबंधक (अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग विभाग) अश्विनी वत्स ने नीरव मोदी को उसके मेल का जवाब भेजा है. उसमें कहा गया है, ‘आप गैरकानूनी और अनधिकृत तरीके से कुछ बैंक अधिकारियों के जरिए एलओयू हासिल कर रहे थे. किसी भी समय हमारे बैंक द्वारा आपकी तीन भागीदार कंपनियों को यह सुविधा नहीं दी गई थी.’

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नीरव मोदी की गैरकानूनी गतिविधियां सामने आने के बाद बैंक ने इसकी जानकारी विधि जांच एजेंसियों को दी, क्योंकि इसमें जाहिरा तौर पर फेमा और मनी लांड्रिंग निरोधक कानूनों का उल्लंघन हुआ है. बैंक की ओर से नीरव मोदी को दिए गए जवाब में कहा गया है, ‘आपने कुल देनदारी नक्की करने की जो प्रतिबद्धता व्यक्त की है उसके साथ शुरुआती रकम या कोई समयबद्ध योजना पेश नहीं की गई है. यदि आपके पास कोई पुख्ता तथा क्रियान्वयन योग्य योजना है, तो इसका ब्योरा दें.’

इससे पहले पीएनबी को भेजे पत्र में नीरव मोदी ने कहा था कि बैंक ने इस मामले से निपटने में जरूरत से ज्यादा हड़बड़ी दिखाई, जिससे उसका ज्वेलरी ब्रांड पूरी तरह नष्ट हो गया और साथ ही उसकी बकाया चुकाने की क्षमता भी संकट में पड़ गई.

पत्र में कहा गया है कि गलत तरीके से पेश की गई देनदारियों को लेकर मीडिया ने हंगामा खड़ा कर दिया और इसके चलते तुरंत की छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई शुरू हो गई. इसका परिणाम यह हुआ कि फायरस्टार इंटरनेशनल और फायरस्टार डायमंड इंटरनेशनल (उसके आभूषण कारोबार समूह की कंपनियां) अब चलने की हालत में नहीं रह गई हैं. इससे बैंकों के समूहों को उनके बकाये के भुगतान की हमारी क्षमता संकट में पड़ गई है.

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टिप्पणियां नीरव मोदी ने पत्र में कहा, ‘तत्काल अपने बकाये की वसूली के उत्साह में 13 फरवरी को मेरी पेशकश के एक दिन बाद इस मामले को सार्वजनिक कर दिया गया और 15 फरवरी को आपकी ओर जो भी गतिविधियां की गईं उससे मेरा ब्रांड और कारोबार चौपट हो गया.’ बता दें कि इस 11,400 करोड़ रुपये के घोटाले में मोदी की जांच प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई सहित विभिन्न जांच एजेंसियां कर रही हैं.

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