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क्या जज लोया के परिजनों पर आरोप वापस लेने का दबाव है? जाँच ज़रूरी!

क्या जज लोया के परिजनों पर आरोप वापस लेने का दबाव है? जाँच ज़रूरी!
जज बृजगोपाल लोया की संदिग्ध मौत को लेकर अंग्रेज़ी पत्रिका कारवाँ में आई सनसनीख़ेज़ स्टोरी के बाद फैले सन्नाटे से अब मीडिया उबर रहा है। पहले एनडीटीवी ने और फिर इन्डियन एक्सप्रेस ने बताया कि संदेह करना ठीक नहीं, जज बृजगोपाल लोया की मौत दिल के दौरे से हुई थी। दिलचस्प बात है कि दोनों के पास एक जैसी ही बातें थीं और उन्होंने ग़लत तारीख़ वाली ईसीजी रिपोर्ट पेश करने की ग़लती भी एक जैसी ही की थी। एक फ़र्क़ था तो ये कि एनडीटीवी ने माना था कि जज को अस्पताल ऑटो से ले जाया गया था जबकि एक्स्प्रेस ने कार ‘उपलब्ध’ करा दी थी। ( कार ने तीन किलोमीटर की दूरी डेढ़ घंटे में तय की थी !)

ज़ाहिर है, कारवाँ की स्टोरी ख़ारिज नहीं हुई। और अब टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापा है कि मरहूम जज लोया के बेटे अनुज ने बंबई हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस से मिलकर कहा कि उसे कोई शक़ नहीं है, पिता की मृत्यु स्वाभाविक थी।

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