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रिपोर्ट :- क्या 21वीं सदी के हिंदुस्तान में मुसलमानों का अलग शरिया कोर्ट होना चाहिए ?

रिपोर्ट :- क्या 21वीं सदी के हिंदुस्तान में मुसलमानों का अलग शरिया कोर्ट होना चाहिए ?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा हर जिले में शरिया कोर्ट खोलने की इच्‍छा को भाजपा नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने देश को विभाजिक करने की साजिश करार दिया है। इससे पहले भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने भी इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि भारत कोई इस्लामी गणराज्य नहीं है और अदालतें कानून के अनुसार काम करेंगी|

सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने कहा, 'यह देश को विभाजित करने और अलगाव पैदा करने का एक तरीका है। भारत में सिर्फ एक अदालत और एक कानून है। संविधान सुरक्षाबल का मार्गदर्शन कर रहा है और इसके बाहर कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा। अगर ऐसा कोई भी प्रयास किया जाता है, तो सरकार द्वारा दृढ़ता से इसे रोका जाना चाहिए। साथ ही इन लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।'

ये है मामला

गौरतलब है कि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआइएमपीएलबी) ने कहा था कि वो वकीलों, न्यायाधीशों और आम लोगों को शरिया कानून से परिचित कराने के लिए कार्यक्रमों को और तेज करने पर विचार करेगा। बोर्ड की कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य जफरयाब जीलानी ने बताया था कि अब बदलते वक्त में यह जरूरत महसूस की जा रही है कि तफहीम-ए-शरीयत कमेटी को और सक्रिय करते हुए इसका दायरा बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड अब यह कोशिश कर रहा है कि हर जिले में शरिया अदालतें हों, ताकि मुस्लिम लोग अपने शरिया मसलों को अन्य अदालतों में ले जाने के बजाय दारुल-क़ज़ा में सुलझायें।


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