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तीन तलाक पर बिल लागू होने से , मुस्लिम महिलाओ के लिए क्या कुछ बदलेगा

तीन तलाक पर बिल लागू होने से , मुस्लिम महिलाओ के लिए क्या कुछ बदलेगा
तीन तलाक को जुर्म घोषित करने और सजा मुकर्रर करने संबंधी विधेयक गुरुवार को लोकसभा में करीब छह घंटे की लंबी बहस के बाद पारित हो गया. बिल का नाम ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट' है. बिना किसी संशोधन के पास इस विधेयक के तहत अब ट्रिपल तलाक को दंडनीय अपराध बनाया गया है. राज्यसभा में पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये कानून का शक्ल अख्तियार कर लेगा. ऐसे में सबकी दिलचस्पी इस बात में है कि इसका असर क्या होगा. मुस्लिम महिलाओं को अब अगर कोई तीन तलाक देता है, तो क्या विकल्प होंगे और उनके लिए इससे क्या कुछ बदलेगा.

क्या बदलेगा?

तीन तलाक विरोधी कानून लागू होने के बाद अगर कोई पति अपनी पत्नी को एक समय में तीन तलाक देता है, तो पत्नी कानून की शरण में जाकर न्याय की लड़ाई लड़ सकेगी. ये कानून मुस्लिम महिलाओं को वैधानिक ताकत देगा.

तीन तलाक पीड़ित महिला को मजिस्ट्रेट के पास जाने की ताकत देगा. इससे महिला अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ सकेगी और अपने हक को हासिल कर पाएगी. इस बिल के बाद तीन तलाक देना एक जुर्म माना जाएगा.

तीन तलाक विरोधी कानून का लाभ देश के मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा. 2011 की जनगणना के मुताबिक 8.4 करोड़ मुस्लिम महिलाएं हैं, जिन्हें इसका लाभ मिलेगा.

विधेयक में प्रावधान

किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को एक साथ एक समय में तीन तलाक चाहे बोलकर, लिखकर या मोबाइल, कम्प्यूटर के जरिए वाट्सएप, फेसबुक, मेल आदि के रूप में करता है तो उसे गैरकानूनी माना जाएगा. 

एक साथ तीन तलाक देने वाले को एक साल से तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है. इसके लिए पत्नी को कोर्ट में ये साबित करना पड़ेगा कि उसके पति ने उसे एक समय में तीन तलाक दिए हैं. 

तीन तलाक पीड़ित पत्नी और बच्चों के जीवन यापन के लिए गुजारा भत्ता मिलेगा. पत्नी नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा की भी हकदार हैं.

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